धर्म मार्गदर्शन

Home » श्री कृष्ण

Category Archives: श्री कृष्ण

Advertisements

5. श्री कृष्ण

1. ॐ श्री परमात्मने नमः।

2. ॐ श्री कृष्णाय नमः।

3. ईश्वर के अनेक नाम है।

4. श्री कृष्ण यह ईश्वर का साकार नाम है।

5. श्री कृष्ण एक अद्वितीय व्यक्तित्व है।

6. श्री कृष्ण ने जो लीलाये (अद्भुत कर्म) किये है वह मानव नहीं कर सकता।

7. भगवद गीता जैसा अद्वितीय ग्रन्थ कहना, कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग का निर्माण करना यह सब श्री कृष्ण की अलौकिकता है।

8. श्री कृष्ण ने भगवद्गीता यह अद्भुत ग्रन्थ मानवों को दिया है। ऐसा ग्रन्थ कोई साधारण मानव नहीं कह सकता।

9. श्री कृष्ण की लीला अगाध है। उन्होंने अपने प्रत्येक जीवनकार्य से लोगों को कोई ना कोई सन्देश दिया है। और वह सन्देश सनातन है। इसलिए श्री कृष्ण ने जिस धर्म की बात कही है उस धर्म को सनातन धर्म कहते है।

10. श्री कृष्ण बचपन से ही धनवान थे, उनके पास करीब दस हजार गाये थी, उनके पास दूध, दही, माखन तथा उनसे बननेवाले पदार्थों की विपुलता थी। उन्हें किसीभी चीज की कमी नहीं थी। वे अतिरिक्त संचय के खिलाफ थे। इसीलिए वे अपने घर तथा पड़ोसियों के घर का अतिरिक्त माखन लोगों में बांटते थे। माखन की हंडिया तोड़कर उसे गरीबों में बाँट दिया करते थे। इससे उन्होंने सन्देश दिया कि अवास्तविक संचय मत करो, उसे गरीबों में बाँट दो।

11. वे अतिरिक्त संचय के विरुद्ध थे, संपत्ति, वस्तु तथा पदार्थों का अतिरिक्त संचय करना, उसमे आसक्ति रखना यह श्री कृष्ण को मान्य नहीं है।

12. जीवन आनंदमय है। जीवन को पूरी तरह से जियो। आसक्ति मत रखो। आसक्ति ही दुःख का कारण है। यह सन्देश श्री कृष्ण ने अपने लीलाओं से दिया है।

13. भगवद्गीता यह ग्रन्थ मानव के दुःख को दूर करता है। लोगों को आसक्तिरहित, स्वार्थरहित जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है।

14. श्री कृष्ण ने जो कहा है वह किया है। श्री कृष्ण का सम्पूर्ण जीवन अद्भुत और आश्चर्यचकित करनेवाला है।

15. कामनाविरहित प्रेम यह श्री कृष्ण का सन्देश है। कामनाविरहित, आसक्तिरहित प्रेम ही सच्चा है और सुख शांति देनेवाला है।

16. श्री कृष्ण का जीवन सांसारिक और व्यावहारिक लोगों के लिए पथदर्शक है।

17. कृष्ण का अर्थ है आकर्षक व्यक्तिमत्व।

18. वे सदैव प्रसन्न रहते थे, आसक्तिरहित रहते थे। सबका भला करते थे।

19. उनके जैसे अदभुत लीला कोई मानव नहीं कर सकता इसलिए शास्त्रों ने उनको सम्पूर्ण ईश्वर-अवतार माना है।

20. उनके नाम का मन्त्र जपने से मानवों के दुःख दूर होते है। वह मन्त्र है हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

21. श्री राम और श्री कृष्ण यह दो नहीं है, एक ही है। उनके नाम दो है, मात्र वे एक ही है। उनके नाम का मन्त्र निराकार ईश्वर ॐ की साकार भक्ति का परिचायक है।

22. ईश्वर निराकार है, किन्तु ईश्वर के लिए सबकुछ संभव है, ईश्वर निराकार से साकार भी बन सकते है और साकार से निराकार भी, दृश्य से अदृश्य और अदृश्य से दृश,  सबकुछ ईश्वर के सामर्थ्य में है। इसलिए मानवों को निराकार और साकार में समन्वय स्थापन करना चाहिए। यह समन्वय धर्म में स्थापित है, पंथ, उप-पन्थो में नहीं। इसलिए तुम धर्म के अनुयायी बनो, इस सत्य धर्म हिन्दुधर्म का अनुकरण करो।

Advertisements