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43. ज्योतिष

  1. ॐ श्री परमात्मने नमः।
  2. ईश्वर ने समस्त सृष्टि का निर्माण किया है। इस सृष्टि में जो ग्रह, तारे है, मनुष्य जीवन है।यह ईश्वर ने बनायीं प्रकृति है।
  3. सभी ग्रह तारे अपनी कक्षा में घूमते रहते है, प्रकृति के नियमों से चलते है। इसी गृह्तारों के नियमों का अभ्यास है ज्योतिष।
  4. ग्रह तारों का एक दूसरों पर कोई चुम्बकीय असर होता है। उसीतरह पृथ्वी पर भी असर होता है।
  5. चंद्र यह पृथ्वी का एक उपग्रह है। चंद्र जब पृथ्वी के नजदीक आता है तो समंदर में ज्वारभाटा आता है। अर्थात चंद्र की चुम्बकीय शक्ति पृथ्वी पर जो पानी है उसपर असर करती है। मनुष्य के शरीर में ६५% प्रतिशत पानी होता है। निश्चित इस पर भी चंद्र का असर होता होगा जो मनुष्य के स्वभाव पर असर करता है।
  6. अगर ग्रहों की चुम्बकीय शक्ति का पृथ्वी पर असर होता है, तो निश्चित ही पृथ्वी के जीवन पर भी इसका असर होता होगा, अर्थात ग्रह भी पृथ्वी पर और पृथ्वी के पानी और जीवन पर असर करते होंगे।
  7. ग्रहों-तारों के अभ्यास और उनका मनुष्य जीवन पर होनेवाले असर का अभ्यास ही ज्योतिष है।
  8. ज्योतिष यह धर्म नहीं है। यह एक गृह्तारों का अभ्यास है और उनका मनुष्य जीवन पर होनेवाले असर का अभ्यास है।
  9. ग्रह तारों के अभ्यास से मनुष्य को तिथिया तथा अन्य भौगोलिक घटनाओं का पता चलता है। वार, महीना, वर्ष की गिनती करने में सहायता होती है।
  10. ज्योतिष कुछ पूजा-पाठ करने के लिए भी कहते है- जैसे ग्रह शांति। इसका उद्देश है ग्रहों को मनुष्य जीवन पर जो असर होता है उसे कम करना। वास्तव में इन पूजापाठ से मनुष्य में आतंरिक आत्मविश्वास बढ़ता है और इसी आत्मविश्वास के बल पर उसपर ग्रहों का असर कम होता है। बशर्ते ये सभी पूजापाठ विश्वास के साथ होने चाहिए।
  11. देव-देवताओं की उपासना करने से भी यह आत्मविश्वास बढ़ाया जाता है, जिसके बल पर मनुष्य अपने उपर होने वाले ग्रह के असर का निराकरण कर सकते है। ईश्वर पर दृढ विश्वास ही मनुष्य की रक्षा करता है।
  12. स्वामी विवेकानंद कहा है कि ग्रहों का मनुष्य पर असर होता है या नहीं मुझे मालूम नहीं, अगर असर होता हो फिर भी ग्रहों को डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकी एक ग्रह मनुष्य के पास होता है वह है निग्रह। निग्रह द्वारा किसी भी ग्रह के असर को दूर किया जा सकता है।
  13. मनुष्य अपना जीवन अनुशासित रखे तो निश्चित ही उसपर होने वाले ग्रह के असर को नियंत्रित किया जा सकता है।
  14. ज्योतिष में सभी ज्योतिषी विशेषज्ञ नहीं होते। अगर चूक हुई तो भ्रम फैलते है, इसीलिए जोतिश की सलाह शतप्रतिशत सही नहीं होती।
  15. मनुष्य ने अपनेआप पर विश्वास रखना चाहिए। मनुष्य की अपने भाग्य का विधाता है। उसके कर्म ही उसकी जीवन दिशा तक करते है।
  16. संत तुकडोजी महाराज ने ग्रामगीता में लिखा है- सुखदुख का कोई नहीं दाता, अपन ही अपने भाग्य विधाता। अधोगति से उन्नति प्राप्त की जाती है अगर कार्य किये जाए।
  17. ईश्वर की उपासना से मनुष्य की आध्यात्मिक शक्ति बढती है, यही शक्ति मनुष्य को सन्मार्ग पर रखती है।
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