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41. कर्ज

  1. ॐ श्री परमात्मने नमः।
  2. प्रत्येक मनुष्य पर कई प्रकार के कर्ज होते है कुछ पारलौकिक कर्ज होते है तो कुछ भौतिक कर्ज होते है।
  3. ईश्वर ने तुम्हारे लिए यह सृष्टि बनायीं है, इस सृष्टि में तुम्हारे लिए सूर्य, चंद्र, पृथ्वी, हवा, जल निर्माण किये है। इसका शुल्क ईश्वर ने तुम्हे कभी माँगा नहीं। यह तुम पर ईश्वर का कर्ज है।
  4. ईश्वर की कृपा से माता-पिता ने तुम्हे जन्म दिया, तुम्हारा पालन किया, उनका भी तुम पर कर्ज है।
  5. तुम्हे गुरु ने शिक्षा दी उनका भी तुम पर कर्ज है।
  6. तुम जिस देश में रहते हो, जिस समाज में रहते हो, उनका भी तुम पर कर्ज बनता है।
  7. तुम यह कर्ज कैसे लौटाओगे? ईश्वर का कर्ज लौटाने के लिए तुम्हे ईश्वर की निस्वार्थ भक्ति, उपासना करनी होगी।
  8. माता-पिता का कर्ज लौटाने के लिए तुम्हे उनकी सेवा करनी होगी।
  9. तुम पर पितृ ऋण भी होता है। यह पितृ-ऋण लौटाने के लिए तुम्हे वंश बढ़ाना होता है।
  10. गुरु का कर्ज लौटाने के लिए तुम्हे उन्हें दक्षिणा देनी होगी।
  11. देश, समाज का कर्ज लौटाने के लिए तुम्हे देशसेवा, समाजसेवा करनी है।
  12. कुछ भौतिक कर्ज भी मनुष्य लेता है जैसे गृहकर्ज, व्यावसायिक कर्ज ई।
  13. भौतिक कर्ज लेने से पहले तुम अपनी मासिक कमाई को ध्यान में रखकर ही कर्ज लो, अन्यथा दुःख भोगोगे। क्या तुम यह कर्ज लौटाने के लिए समर्थ हो यह सोचे तभी कर्ज ले।
  14. खेती के लिए, शेअर खरीद ने के लिए, चुनाव में हिस्सा लेने के लिए कर्ज लेना महंगा पड़ सकता है.
  15. निसर्ग पर आधारित और जानता के रुझान पर आधारित व्यवसाय या गतिविधि में पैसा डालने के लिए कर्ज न ले, यह बहुत ही अनिश्चित और धोकादायक है। क्योंकि निसर्ग और जनता का रुझान कभी भी पलट सकता है।
  16. जो लोग कर्ज लेते है इन्हें मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए कर लेते वक्त सोच समझ कर ले। अपने लौटाने की क्षमता को आंकने के बाद ही कर्ज ले। अन्यथा दुःख और मानसिक अशांति मिलेगी।
  17. बुरे लोगों से कर्ज मत ले, वे आपको फंसा सकते है। ऐसे मामलों में असुर प्रवृत्ति के लोगों से दूर रहे।
  18. सभी कर्जों में ईश्वर का कर्ज सबसे सस्ता है, ईश्वर की उपासना करने से ही वह कर्ज लौटाया जा सकता है। इसलिए तुम्हारा कर्तव्य समझ कर तुम ईश्वर की उपासना करो।
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