धर्म मार्गदर्शन

Home » Uncategorized » 35. भ्रम

35. भ्रम

1. ॐ श्री परमात्मने नमः।
2. ईश्वर सर्वव्यापक है, वह सर्वशक्तिमान है। ईश्वर के लिए सबकुछ संभव है। फिर भी कुछ लोग भ्रम पालते रहते है।
3. कुछ लोग कहते है- ईश्वर निराकार है तो वह साकार कैसे बनता है? यह सवाल पूछना ही भ्रम है। इसका उत्तर है- ईश्वर के लिए सबकुछ संभव है। यह संपूर्ण सृष्टि ईश्वर के अधीन है।
4. कुछ लोग कहते है- ईश्वर एक है तो ईश्वर के अनेक रुप और अनेक नाम कैसे? इसका उत्तर है- ईश्वर सर्वव्यापी है, वह अनंत, अमर्याद है, ऐसे अनंत ईश्वर को एक नाम में बंदिस्त करना अशक्य और अनावश्यक है. ईश्वर निराकार और साकार दोनों रूप धारण कर सकता है, ईश्वर के लिए सबकुछ संभव है।
5.जो लोग इसतरह ईश्वर पर संशय करते है वे भ्रम पालते है।
6. ईश्वर ने मनुष्य को निर्माण करके उसे सद्सदविवेकबुद्धि दी है। यह बुद्धि सबको दी है, चाहे वह धनवान हो या निर्धन, स्त्री हो या पुरुष, विद्वान हो या अज्ञानी। इस बुद्धि का उपयोग करके मनुष्य आचरण करें, किन्तु लोग इस बुद्धि का उपयोग नहीं करते और भ्रम में पड़ते है।
7. कुछ लोग ईश्वर के नाम पर बहाने करते रहते है, यह बहाने करना भ्रम है।
8. कुछ लोग बहाने करते है कि ईश्वर आदेश देता है और इस आदेश का पालन करो। हे मनुष्यों, तुम इस भ्रम में मत पडो, याद रखो की ईश्वर मनुष्य को कोई आदेश नहीं देता, क्योंकि वह मनुष्य पर निर्भर नहीं है।
9. कुछ लोग एक विशिष्ट कानून बनाते है और कहते है कि यह ईश्वर का कानून है, इसका पालन करो। किन्तु, हे मनुष्यों, तुम इस भ्रम में मत पडो, याद रखो, कोई भी कानून सनातन नहीं होता, इसलिए ईश्वर ने कोई कानून नहीं बनाया।
10. सनातन केवल धर्म ही है।
11. धर्म कहता है “एक् सद् विप्रा बहुधा वदन्ति” अर्थात ईश्वर एक है, इस ईश्वर को अनेक नामों के पुकारा जाता है, अनेक मार्ग से प्राप्त किया जाता है।जो लोग एक नाम और एक मार्ग का आग्रह धरते है, जबरदस्ती करते है, वे भ्रम फैलाते है। तुम इस भ्रम में मत पडो। याद रखो, ईश्वर के मार्ग में कोई जोर जबरदस्ती नहीं है।
12. मनुष्य दुनिया में आते है और जाते है, किन्तु ईश्वर स्थिर है।
13. मनुष्य अस्थायी है, ईश्वर स्थायी है। वह जगत को व्याप्त करके भी मौजूद है, वह अनंत है।
14. कुछ लोग कहते है ईश्वर ने यह आदेश दिया है, वह आदेश दिया है, औरतों को ढकने का आदेश दिया है, लोगों को मारने का आदेश दिया है इत्यादि इत्यादि। यह उनका का भ्रम है।
15. कुछ लोग कहते है कि ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए विशिष्ट कपडे पहनो, जानवरों की बलि दो, एक विशिष्ट कृति करो। यह सब उनका भ्रम है। वे भ्रम से संमोहित हुए है।
16. कुछ पंथ/मजहब कहते है कि उनका देवता ही एकमात्र है। यह सब उनका भ्रम है।
17. अपने ही देवताओं को एकमात्र कहना और दूसरों के देवताओं को नकारना, दूसरों को मारना, उनपर जुलुम करना, यह असुर प्रवृत्ति है। असुर प्रवृत्ति का काम ही जगत में भ्रम फैलाना है।
18. इससे कुछ लोग भ्रमित होकर अपना भगवान छोडके असुर देवता को मानने लगते है और अपनी आध्यात्मिक अधोगति का कारण बनते है।
19. एक बार मनुष्य भ्रमित हो जाए तो वह किसी की सुनता नहीं, वह असुरों जैसी हरकते करने लगता है।
20. आज सारी दुनिया असुर प्रवृत्ति से त्रस्त है। इसलिए तुम भ्रम को जानो और अपने आपको भ्रमित होने से बचाओ।
21. तुम सनातन हिन्दुधर्म के आदर्श अनुयायी बनो, सतर्क रहकर व्यवहार करो, सात्विक श्रद्धा को अपनाओ, सत्य के अनुरूप अपना आचरण रखो।

Advertisements

वाचकों की संख्या

  • 9,041