धर्म मार्गदर्शन

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28. एकत्व

1. ॐ श्री परमात्मने नमः ।

2. नि:संशय यह पुस्तक तुम्हे धर्म का सही मार्गदर्शन देती है। इसलिए तुम इस किताब को ठहर ठहर के पढ़ो।

3. हिन्दुओ, तुम्हारे में विविधता है, अनेकता है, तुम्हारी कई भाषाए है, तुम्हारे में विभिन्नता है। लेकिन कुछ लोग इस विभिन्नता को तुम्हारी कमजोरी समझते है और तुम्हारे खिलाफ षडयंत्र करते है।

4. साकार उपासना से तुम विविधतावादी हो, बहु-सांस्कृतिक हो, सर्व-समावेशक हो, यह अच्छा है। किन्तु तुम्हारे इस अच्छाई का बुरे लोग गलत फायदा उठाते है और तुम में फुट डालने का प्रयास करते है।

5. ईश्वर कृपा से तुम में एक भावनात्मक एकत्व है, जो तुम्हे बांध कर रखता है। जैसे फूलों का हार, जिसमे एक धागा विविध फूलों को बांध कर रखता है, उसी तरह तुम्हारी विविधता को एक अदृश्य शक्ति बांध कर रखती है।

6. वह अदृश्य शक्ति है निराकार ईश्वर ॐ।

7. तुम्हारे में विविधता है, अनेकता है, विविध श्रध्दा है, लेकिन तुम सभी जानते हो ईश्वर एक है वह ॐ है।

8. यह ज्ञान तुम्हारे पास पहले से ही है, जिसके कारण तुम्हारे में एकत्व है। यह तुम्हारा भावनिक एकत्व है, तुम्हारा आध्यात्मिक एकत्व है।

9. शारीरिक तथा वास्तविक एकत्व के लिए तुम्हे निराकार ईश्वर की उपासना करनी है।

10. निराकार ईश्वर की उपासना है ध्यान-उपासना। इस ध्यान उपासना का स्थल है ध्यानालय।

11. तुम रोज ध्यान-उपासना के लिए एकत्रित आओ। प्रत्येक मंदिर के पास ध्यानालय निर्माण करो।

12. ध्यानालय में आयोजक नियुक्त करो। आयोजक का कार्य सभी हिंदुओं से संपर्क करके उन्हें ध्यान-उपासना के लिए एकत्रित करना है।

13. जैसे साकार-उपासना के लिए मंदिर है, वैसे ही निराकार-उपासना के लिए ध्यानालय है। आज मंदिरों की संख्या बहोत है, इसलिए तुम अब मंदिर नहीं, ध्यानालयों का निर्माण करो।

14. जैसे ही तुम ध्यान-उपासना के लिए एकत्रित आओगे, तब सभी शैतानी प्रवृतिया, भूतप्रेत, समाजद्रोही तुमसे दूर भागने लगेंगे।

15. रोज ध्यान-उपासना को एकत्रित आने से तुम्हे शांति, सद्-विवेक और ईश्वर की कृपा प्राप्त होगी।

16. तुम्हारा पुण्य-संचय बढ़ेगा। इसलिए तुम अच्छे कर्म करो। जो लोग अच्छे कर्म करते है, उन्हें ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है, ईश्वर का परमधाम प्राप्त होता है।

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