धर्म मार्गदर्शन

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22. ध्यानालय

1. ॐ श्री परमात्मने नमः।

2. यह पुस्तक आपके लिए धर्म का सही मार्गदर्शन है, इसमें कोई संदेह नहीं।

3. ईश्वर निराकार है।

4. इस निराकार ब्रह्म का नाम ॐ है। वह एक और केवल एक ही है। वह ही एक परमात्मा है।

5. निराकार ईश्वर की अनुभूति ध्यान द्वारा ही आत्मा में की जा सकती है।

6. हे मानवो, तुम ध्यान-उपासना करो। नित्य ध्यान-उपासना को आयोजित करो, यह सबसे बड़ा पुण्यकर्म है।

7. जहाँ ध्यान-उपासना की जाती है वह ध्यानालय है।

8. सभी इलाको में, शहर में, गांव में ध्यानालय बनाओ, और ध्यान-उपासना कायम करो। यह उपासना केवल दस मिनिट की है, इसमें आपका समय नष्ट नहीं होता, ना ही आपका पैसा खर्च होता है।

9. तुम अपने मित्रों को, पड़ोसियों को, ध्यान-उपासना करने के लिए आमंत्रित करो।

10. तुम मंदिर में भी एकत्रित आकर ध्यान-उपासना कर सकते हो। तूम मंदिरों में साकार-उपासना के साथ इस निराकार-उपासना को भी आयोजित करो।

11. एक विशिष्ट समय पर ध्यान-उपासना के लिए एकत्रित आओ. सुबह, दोपहर, शाम और रात्रि सोने से पहले ध्यान-उपासना करो. नि:संशय ईश्वर की कृपा दृष्टि आप सभी पर होगी।

12. प्रत्येक व्यक्ति दिन में कम से कम एकबार ध्यान-उपासना करें। यह व्यवस्था तुम्हे संगठित करेगी. तुम्हारे में संपर्क स्थापित करेगी। तुम्हारे में एकता, बंधुत्व स्थापित करेगी।

13. ईश्वर की सब पर समान दृष्टि है, ईश्वर के पास कोई भेदभाव नहीं है। सभी मानव ईश्वर के सामने समान है।

14. जो लोग ध्यान-उपासना करते है वे विशेष है, क्योंकि वे अपना कर्तव्यकर्म जानते है।

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