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20. परमधाम

1. ॐ श्री परमात्मने नमः ।

2. ईश्वर एक है, वह ॐ है।

3. ईश्वर के कई नाम है।

4. निराकार का नाम ॐ है।

5. यह ज्ञान तुम्हारे पास हजारों साल पहले वेदों द्वारा आया है, तुम इस ज्ञान को आत्मसात करो।

6. कुछ लोग तुम्हे गुमराह करने की कोशिश करेंगे, बहकायेंगे। वे तुम्हारे मित्र नहीं हो सकते। तुम उनके जैसे भ्रष्ट न बनो। उनसे कहो, “ईश्वर एक है, वह ॐ है। वह निराकार है।”

7. ईश्वर अदृश्य है, वह दीखता नहीं। वह सम्पूर्ण निराकार है। ईश्वर का कोई एक मंदिर नहीं है, कोई एक घर नहीं है, एक स्थान नहीं है, वह सर्वत्र है। सर्वव्यापी है।

8. निराकार ईश्वर का अनुभव अंतर्मन में ध्यान द्वारा ही होता है।

9. निराकार ईश्वर की एक ही उपासना है – वह है ध्यान-उपासना।

10. तुम ध्यान-उपासना के लिए एकत्रित आओ। जैसे ही तुम ध्यान-उपासना के लिए एकत्रित आओगे, ईश्वर की कृपा तुम पर सदैव रहेगी।

11. ईश्वर का परमधाम यह मनुष्य जीवन का मूल उद्देश है।

12. इस परमधाम को प्राप्त करने के लिए तुम सदैव ध्यान-उपासना करो।

13. यह जानते हुए भी कुछ लोग मानेंगे नहीं, वे अवज्ञा करेंगे। तुम उनको सूचित करो, जो अच्छे है वे मानेंगे, जो नहीं मानेंगे वे अवज्ञाकारी है। उनके लिए अधोगति है।

14. ऐसे अवज्ञाकारीयों को तुम चाँद तारे भी तोड़कर दोंगे, तो भी वे मानेंगे नहीं। तुम उनका आचरण न करो। उनके जैसे न बनो।

15. भगवदगीता ने कहा है- जो लोग योगाभ्यास (ध्यान) में स्थित होकर परम पवित्र ॐ का उच्चारण करते है, ईश्वर का स्मरण करते है, उन्हें आध्यात्मिक लोक अर्थात ईश्वर के परमधाम की प्राप्त होती है।

16. ईश्वर का परमधाम प्राप्त करने के लिए सृष्टि के आरम्भ से ही “ॐ तत् सत्” का उच्चारण किया जाता है।

17. ईश्वर ही तुम्हारा उद्धारकर्ता है, परमधाम देनेवाला है।

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