धर्म मार्गदर्शन

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14. सत्यमार्ग

1. ॐ श्री परमात्मने नमः।

2. धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष यह ईश्वर ने तुम्हे दिए हुए चार पुरुषार्थ है। तुम इस जीवनध्येय का आचरण जैसे तुम्हे बताया गया है वैसे करो। यह तुम्हारे लिए सत्यमार्ग है।

3. अगर तुम इसकी अवहेलना करोगे, अतिरेक करोगे, तो निसंशय तुम्हे दुःख प्राप्त होगा।

4. इसलिए तुम संभलो और ईश्वर के नाम का उच्चारण करो।

5. कुछ लोग अपनी-अपनी भाषाओँ में ईश्वर को नाम देते है। कोई गलत नहीं, ईश्वर के कई नाम है।

6. किन्तु कुछ लोग किसी विशिष्ट नाम पर अड़ जाते है, दुराग्रह करते है। वे अपनी एक विशिष्ट भाषा पर अड़े है। उनसे कहो, “छोड़ो वह भाषा और अपनाओ उस जमीन की भाषा जहा तुम जन्मे हो तथा जो तुम्हारी कर्मभूमि है। यही तुम्हारे लिए सत्यमार्ग है।”

7. किन्तु कुछ दुराग्रही कहते है कि उनका देवता ही श्रेष्ट तथा एकमात्र है। उनसे कहो, “ईश्वर तो निराकार है, वही एकमात्र है, यह ॐ है। यही वास्तविकता है।”

8. किन्तु वे तुम्हे हर संभव गुमराह करने की कोशिश करेंगे। उनको जो कुछ करना है करने दो। तुम सिर्फ ॐ का ध्यान करो, वही एकमात्र निराकार ईश्वर है।

9. ॐ तत् सत् अर्थात ॐ ही सत्य है।

10. दुराग्रही कहते है कि उनके कथित देवता ने मेहनत करके धरती बनायीं। उनसे कहो, “केवल धरती की क्या बात करते हो, यह जो अनंतकोटी ब्रह्माण्ड है यह ईश्वर की निर्मिती है।”

11. धरती बनाने के बाद उनका देवता थक जाता है, फिर आराम करता है, सिंहासन पर बैठता है। क्या आराम करनेवाला और सिंहासन पर बैठनेवाला देवता निराकार हो सकता है? उन दुराग्रही को कहो, “मान जाओ, आखिर सबको परमात्मा की तरफ लौटना है। कहो ॐ, वही तो संभालनेवाला है।”

12. जब तुम ईश्वर की तरफ लौटोगे, तभी तुम्हे ईश्वर का परमधाम प्राप्त होगा। जो अवज्ञा करेंगे, उनके लिए तो आध्यात्मिक अधोगति है।

13. दुराग्रहियों के विचार उनके अपने विचार है, आप उनके विचारों को मानने के लिए बाध्य नहीं हो, आप स्वतंत्र हो।

14. धिक्कार करो उन दुराग्रहियों का जो तुम्हारे धर्म का अपमान करते है।

15. धिक्कार करो उन दुराग्रहियों का जो तुम्हे सत्यमार्ग से विचलित कहना चाहते है।

16. तुम दृढ़ निश्चय रखो कि ईश्वर निराकार है और साकार भी है।

17. ‘एकसदविप्रा बहुधा वदन्ति’ अर्थात वह एकही है किन्तु लोग ईश्वर को अनेक नामों से पुकारते है। क्या यह वेदों का मन्त्र तुम भूल गए? जो ज्ञान तुम्हारे पास पहले से ही आया है, फिर भी तुम भटकोगे? उस ज्ञान को आत्मसात करो।

18. क्या तुम भगवदगीता का श्लोक भूल गए, जिसमे कहा कि ईश्वर निराकार भी है और साकार भी!

19. तुम किसी भी साकार की उपासना करो, लेकिन इसके साथ निराकार ॐ का उच्चारण करो। समर्पित रहो और अपनी अध्यात्मिक अधोगति से बचो।

20. ईश्वर का ध्यान करो, यही तुम्हारे लिए सत्यमार्ग है।

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