धर्म मार्गदर्शन

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13. मोक्ष

1. ॐ श्री परमात्मने नमः।

2. मनुष्य का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है।

3. जिवनसागर से मुक्ति प्राप्त करके ईश्वर का परमधाम प्राप्त कहना ही मोक्ष है।

4. इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति मुक्ति के लिए संघर्षरत रहता है।

5. भय से मुक्ति, तनाव से मुक्ति, गुलामी से मुक्ति, अज्ञान से मुक्ति, रोग से मुक्ति, असुरक्षा से मुक्ति मनुष्य चाहता है।

6. मनुष्य जन्मतः अशांत है। अध्यात्म उसे शांति प्रदान करता है।

7. अध्यात्म द्वारा मनुष्य को दुःख, शोक और मृत्यु-भय से मुक्ति मिलती है। अध्यात्म ईश्वर का परमधाम प्राप्त करने में सहायक है।

8. मोक्ष का पहला मूलमंत्र है इच्छाओं का त्याग।

9. मन की समस्त इच्छाए, आसक्ति समाप्त होना ही मोक्ष की प्रथम आवश्यकता है।

10. प्रत्येक मनुष्य मरनेवाला है। मरने के बाद वह अपने कर्म के अनुसार अपनी अध्यात्मिक गति प्राप्त करता है।

11. अगर वह धर्मसंग्रह करेगा, पुण्य का संचय करेगा, इच्छाओं का त्याग करेगा तो उसे ईश्वर का परमधाम प्राप्त होता है। वह मोक्ष है।

12. जैसे पानी की बूंद सागर में मिल जाती है। उसी तरह आत्मा परमात्मा मे विलीन होता है, उसे मोक्ष मिलता है।

13. मोक्ष पाने के लिए मनुष्य का आचरण महत्वपूर्ण है। इसलिए वह धर्म का सही तरीके से पालन करे। इस धर्म मार्गदर्शन को पढ़े और उसके अनुसार आचरण करे।

14. भगवद्गीता कहा है, “जो अक्षर, अनिर्देश्य (जिसके स्वरुप को बताया नहीं जा सकता), अव्यक्त, सर्वत्र गम्य (हर जगह उपस्थित) की उपासना करते है, जो इन्द्रियों के समूह को संयमित कर, हर ओर हर जगह समता की बुद्धि से देखते हुए, सभी प्राणियों के हित करते है। जो अनन्य भक्तियोग द्वारा ईश्वर का ध्यान करते है। जो सभी इच्छाओं का त्याग करते है। ऐसे व्यक्ति, स्त्री, पुरुष, साधक तथा भक्त को मोक्ष प्राप्त होता है।”

15. मोक्ष देते समय ईश्वर तुम्हारे कर्म देखते है। तुम्हारा कार्मिक खाता देखा जाता है।

16. ईश्वर किसी की शिफारिश नहीं सुनता, न ही किसी की तरफदारी करता है। वहाँ किसी मध्यस्थ की नहीं चलती।

17. वहाँ तुम्हारे पापों को माफ़ी नहीं मिलती।

18. जो लोग तुम्हारे पाप नष्ट करने का दावा करते है, तुम्हारी शिफारिश या तरफदारी करने का दावा करते है, वे तुम्हे धोके में रखते है। उनसे दूर रहो, उनका मार्ग अधोगति का है।

19. कुछ लोग कहते है कि उनकी देवता को मानो तो तुम्हे स्वर्ग मिलेगा, वहाँ बाग होंगे, शराब मिलेगी, अप्सरा मिलेगी इत्यादि लालच देते है, तुम्हे गुमराह करने की कोशिश करेंगे। यह उनका प्रचार प्रसार है।

20. इस तरह की बाते करके, इस तरह का स्वर्ग का चित्रण करके वे वास्तव में ईश्वर का अपमान करते है, अपराध करते है, तुम उनके झांसे में मत पडो।

21. ईश्वर सर्वज्ञ है। ईश्वर सब कुछ जानते है।

22. तुम ईश्वर पर दृढ़श्रद्धा रखो और अच्छे कर्म का संचय करो।

23. तुम्हारे अच्छे कर्म ही तुम्हे मोक्ष प्राप्त करने में सहायक है। इससे ही तुम्हारा उद्धार होगा। याद रखो की तुम खुद ही तुम्हारे उद्धारकर्ता हो।

24. तुम्हारा मोक्ष तुम्हारे हाथ में है, अन्य के नहीं।

25. मोक्ष प्राप्त करने में सबसे महत्वपूर्ण है कि तुम आसक्ति रहित बनो, अच्छे कर्म करो, पुण्य प्राप्त करो, ईश्वर का ध्यान करो, धर्मसंचय करो।

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