धर्म मार्गदर्शन

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9. दृढ-श्रध्दा

1. ॐ श्री परमात्मने नमः।

2. ईश्वर परमदयालु परमात्मा है। यह कृपा करनेवाला है।

3. ॐ ईश्वर का सर्वश्रेष्ठ नाम है। यह वेदो ने कहा है और सब जानते है।

4. किन्तु कुछ लोगों ने इस सत्य से मुह फेर लिया है, ऐसे लोग अज्ञान और अधोगति के मार्ग पर चल रहे है।

5. उन्होंने कई धर्म बनाये है। क्या जितने धर्म है उतने ईश्वर है? नहीं। ईश्वर एक ही है।

6. वह निराकार है। ॐ ईश्वर का सर्वश्रेष्ट नाम है।

7. यह ज्ञान तुम्हारे पास पहले से ही है। किन्तु कुछ लोग उसे भूल गए, उन्हें फिर से याद दिलाया जा रहा है। अब तुम सब इस निराकार पर दृढ़श्रद्धा रखो।

8. वेदों ने कहा है- “ ईश्वर एक है, वह ॐ है। किन्तु लोग ईश्वर को अलग अलग नामों से पुकारते है।”

9. कुछ लोग अपने अलग अलग काल्पनिक पंथ, मजहब बनाकर निराकार ईश्वर ॐ को भूल गए है और अपनी परंपरा या भाषा में अपनी देवता को पुकारते है। किन्तु तुम याद रखो कि ईश्वर एक है, वह ॐ है।

10. कुछ लोग भटक रहे है, तो कुछ लोग गलत रास्तों पर चल रहे है।

11. उन्हें कहो कि वापस फिरो और ॐ को अपनाओ। इसका कोई प्रायचित्त नहीं। ईश्वर क्षमा करनेवाला तथा कृपालु है।

12. ईश्वर अदृश्य है। ईश्वर को कोई देख नहीं सकता।

13. हे मानवो, तुम भौतिक नियमों से बंधे हो, तुम निराकार ईश्वर को देख नहीं सकते। ईश्वर को प्रकट होने के लिए साकाररूप धारण करना पडता है तभी सामान्य मानव ईश्वर को देख सकता है। लेकिन कुछ मुढवादी लोग ईश्वर के इस अद्बुत कार्य को समझ नहीं सकते, उनके दिल और दिमाग काम नहीं करते।

14. हे मानवो, तुम ईश्वर की विराटता, अनन्तता को देख नहीं सकते। इसलिए तुम ईश्वर के किसीभी रूप तथा नाम के पहले ॐ का उच्चारण करो। इससे तुम भ्रष्ट होने से बचोगे।

15. ईश्वर के नाम अनेक है। किन्तु तुम याद रखो वह एक है, वह ॐ है। वह सर्वव्यापी और सर्वसमावेशक है।

16. कुछ एकमुर्तिपुजक या एकेश्वरवादी तुम्हे विरोध करेंगे, तुम्हारे साथ दुराग्रह करेंगे। उनसे कहो, “हम ईश्वर के सामर्थ्य को पहचानते है, वह सर्वशक्तिमान और सर्वत्र है। ऐसे ईश्वर को एक रूप में, एक घर में, एक पत्थर में या एक मूर्ति या रूप में कैसे बंधिस्त किया जा सकता है?

17. इन एकमुर्तिपुजकों को मालूम है कि ईश्वर एक है, वह ॐ है। किन्तु उन्होंने जानबूझकर मुह मोड लिया है, वे कृतघ्य बने है, अवज्ञाकारी बने हुए है। उन्होंने ईश्वर को धोका दिया है। लेकिन ईश्वर बेखबर नहीं है। वह सर्वज्ञ, सबकुछ जाननेवाला है। वे ईश्वर के घेरे से बाहर नहीं जा सकते, आखिर सभी को ईश्वर की ओर लोटना है।

18. इन एकदेवतापूजको ने अपने काल्पनिक देवता का खौफ दिखा कर कई तत्वदर्शियों तथा गुरुओं के क़त्ल किये है। वे कहते है कि उनका ही देवता सही है। उनको कहो, “निराकार ईश्वर ॐ ही एकमात्र है।”

19. उनसे कहो, “कोई पत्थर, पहाड़ी या ईमारत, कोई पुतला एकमात्र ईश्वर नहीं हो सकता। वे खुद अपनी देवता को एकमात्र कहने लगे है, यह घोर अज्ञान है, यह अपराध है। इससे बचो ओर लौट आओ निराकार ईश्वर ॐ की तरफ। तभी तुम्हे सद्गति प्राप्त होगी।”

20. जब तुम्हे सद्गति प्राप्त होने के बाद ही तुम्हे ईश्वर का परमधाम प्राप्त होगा यह निश्चित है।

21. उनसे कहो, “समस्त ब्रह्माण्ड का ईश्वर एक ही है, वह ॐ है।”

22. धैर्य और उपासना से मदत प्राप्त करो, हौसला बढाओ। निसंदेह ईश्वर उन लोगों के साथ है जो धैर्य और दृढता से कार्य करते है।

23. मुढवादी कुछ भी कहे तुम उनपर ध्यान मत दो। बस अपनी श्रद्धा पर दृढता दिखाओ।

24. तुम्हारी दृढता ही तुम्हे हर मुसीबत से बचायेगी। ईश्वर ही तुम्हारा तारणहार है, वही उद्धारकर्ता है।

25. तुम सभी ॐ का उच्चारण करो और ध्यान-उपासना कायम करो।

26. जो ॐ की उपासना करते है, वे कभी पराजित नहीं होते।

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