धर्म मार्गदर्शन

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4. श्री राम

  1. ॐ श्री परमात्मने नमः।
  2. ॐ श्री रामाय नमः।
  3. ईश्वर के अनेक नाम है। साकार नाम अनेक है, निराकार एक है।
  4. श्री राम यह ईश्वर का साकार नाम है। रामनाम ईश्वर की साकार भक्ति का परिचायक है।
  5. रामायण यह भारत का इतिहास है।
  6. श्री राम मानव संस्कृति के आधार है।
  7. अयोध्या में राजा दशरथ का राज था। यह राजा बड़ा पराक्रमी और दानदाता था। इस राजा को चार पुत्र थे- राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न। राजपुत्र राम प्रथम पुत्र थे इसलिए अयोध्या के सिंहासन पर उनका ही अधिकार था।
  8. पिता के वचन का पालन करने के लिए राजपुत्र राम ने इस राज्य का त्याग किया और बनवास को अपनाया। धन्य है वह पुत्र।
  9. उनकी धर्मपत्नी सीता ने पति का साथ देते हुए वनवास को अपनाया। धन्य है वह पत्नी।
  10. उनके भाई लक्ष्मण ने भी अपने भाई और भाभी की रक्षा के लिए उनके साथ निकल पड़े। धन्य है वह बंधू।
  11. राजपुत्र राम ने मना करने के बावजूद भी यह दोनों ने श्री राम के साथ बनवास अपनाया।
  12. राजपुत्र राम बनवासी बन गए। वे तीनों बनवासी बन गए।
  13. ऐसा पुत्र, ऐसी पत्नी, ऐसा भाई मिलना दुर्लभ है। तुम्हारे सामने यह आदर्श ईश्वर ने रखा है।
  14. बनवास में सीता का अपहरण होता है। बनवासी राम सीता की तलाश में निकल पड़ते है।
  15. जब पता चलता है कि सीता का अपहरण लंका के महाशक्तिशाली राजा रावन ने किया है, तो यह बनवासी राम पत्नी को मुक्त करने के लिए लंका की ओर निकल पड़ते है।
  16. रास्ते में हनुमान से मुलाकात होती है, सुग्रीव से दोस्ती होती है और वानर (वन नर) सेना खड़ी करते है।
  17. इस छोटी वानर सेना को लेकर श्री राम लंका में घुसकर रावण पर आक्रमण करते है।
  18. रावन का वध करके उसकी सेना का पूर्ण पराजय करते है, पत्नी सीता को मुक्त करके सन्मान पूर्वक अपनाते है। यह अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतिक है, दुर्जनों के नाश का प्रतिक है और सत्य की विजय का प्रतिक है।
  19. उसी समय बनवास का कालावधि पूर्ण होता है।
  20. श्री राम और सीता अयोध्या आकर दीर्घकाल तक राज करते है। यहाँ रामायण समाप्त होती है।
  21. श्री राम के राज में भुखमरी नहीं थी, दरिद्र्यता नहीं थी, सबको समान अधिकार था, किसी के साथ पक्षपात नहीं था।
  22. यह सुजलाम, सफलाम, सर्वजनसुखायहिताय राज ही रामराज के नाम से जाना जाता है।
  23. रामायण पढ़ने से लोग आश्चर्यचकित होते है कि एक बनवासी ने महापराक्रमी रावण से युद्ध कैसे किया? इतना सामर्थ्य उनके पास कैसेआया?
  24. एक बनवासी दूसरे देश में जाकर वहा के राजा के खिलाफ युद्ध करता है, क्या ऐसा जज्बा, ऐसा हौसला किसी सामान्य मानव में हो सकता है? क्या कोई साधारण मानव यह कर सकता है?
  25. ऐसा सामर्थ्य केवल किसी असाधारण पुरुष अर्थात अवतार में हो सकता है। अवतार का अर्थ असाधारण पुरुष है, ईश्वर का अवतरण है।
  26. श्री राम ने समाज में आदर्श प्रस्थापित किये।
  27. राजा को कई पत्निया मिल सकती है, किंतू श्री राम आजीवन एकपत्नीव्रत रहे।
  28. उनका जीवन लोगों के लिए मार्गदर्शन है।
  29. रामायण ने हमें सिखाया है कि पुत्र कैसा होना चाहिए, भाई कैसा होना चाहिए, पत्नी कैसी होनी चाहिए, मित्र कैसा होना चाहिए, राजधर्म कैसा होना चाहिए। श्री राम का जीवन ही प्रत्यक्ष प्रमाण है।
  30. श्री राम सत्य का प्रतिक है, धैर्य का प्रतिक है, सामर्थ्य का प्रतिक है, न्याय का प्रतिक है, एकवचन का प्रतिक है, एकपत्नीव्रत का प्रतिक है, निति का प्रतिक है, सदाचार का प्रतिक है, नैतिकता का प्रतिक है।
  31. इसी कारण धर्मशास्त्रों ने उन्हें भगवान कहा है। भगवान अर्थात ज्ञानवान, सामर्थ्यवान। प्रत्येक भगवान को ईश्वर का अवतार कहा जाता है, श्रीराम ईश्वरीय अवतार है।
  32. जब भी निराकार ईश्वर साकार होते है,  तो निश्चय ही वे मानव के रूप में आते है। इसतरह श्रीराम केवल मानव नहीं तो परमात्मा के साकाररूप है।
  1. श्रीराम के नामस्मरण से लोगों के दुःख दूर होते है।
  2. जो साकार-उपासक है वे भगवान श्रीराम की भक्ति करें, नामस्मरण करें । जो निराकार उपासक है वे ईश्वर का ध्यान करें।
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