धर्म मार्गदर्शन

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3. देवी-देवता

  1. ॐ श्री परमात्मने नमः ।
  2. ईश्वर निराकार है, वह अदृश्य है, अव्यक्त है।
  3. ईश्वर ने यह प्रकृति निर्माण की है ।
  4. इस प्रकृति की कई शक्तिया है। यह शक्तिया प्रकृति का संचालन करती है।
  5. इन शक्तिओं को देवी-देवता कहा जाता है।
  6. प्रकृति में विविधता है और उस विविधता का संचालन यह देवी-देवता करते है।
  7. जिसतरह सूर्य को देख सकते है उसी तरह इन देवी-देवताओं को देखा जा सकता है, किन्तु उसके लिए मनुष्य के पास दैवी-शक्ति का वरदान होना आवश्यक है।
  8. वह देव-देवता है- गणपति, हनुमान (विघ्नहर देवता, संकटमोचन देवता), शक्तिदेवता(दुर्गा, अम्बा, काली, वैष्णवी, शीतला), धनदेवता (लक्ष्मी) विद्यादेवता (सरस्वती), पृथ्वीदेवता, जलदेवता, अग्निदेवता, आकाशदेवता, वायुदेवता (वरुण), कुलदेवता, ग्रामदेवता, कामदेवता, आरोग्यदेवता, गौदेवता, वृक्षदेवता, नदीदेवता (गंगा, गोदावरी, यमुना, सरस्वती ई।), पर्वतदेवता (हिमालय, गोवर्धन ), वनदेवता, ग्रहदेवता (चंद्र, सूर्य, शनि), शास्त्रदेवता (वेद, भगवद्गीता), वाणीदेवता( स्वर मंत्र), इन्द्रदेवता, प्रजापति इत्यादि ज्ञात और अन्य अज्ञात इसतरह कुल ३३ प्रकार की देव-देवता है।
  9. कुछ कहते है की ३३ करोड देव-देवता है, किन्तु यह उनका अज्ञान है।
  10. वे ३३ कोटी का अर्थ ३३ करोड ऐसा करते है। कोटी यह संस्कृत शब्द है। इस शब्द का अर्थ है संख्या या प्रकार। धर्म शास्त्र में कोटी का अर्थ है प्रकार। अर्थात ३३ कोटी देव-देवता का अर्थ है ३३ प्रकार की देव-देवता।
  11. यह जगत ईश्वर ने जो नियम बनाये है, उस नियमों से चलता है।
  12. यह सारी प्रकृति ईश्वर के बनाये हुए एक विशिष्ट नियमों से चलती है। यह प्रकृति अपने नियम को कभी नहीं तोडती।
  13. यह देव-देवता प्रकृति की वह शक्तिया है जो ईश्वर के अधीन है।
  14. कुछ किताबों में ८ वसु, ११ रूद्र, १२ आदित्य, १ इन्द्र और १ प्रजापति इस तरह ३३ देव-देवताओं का वर्गीकरण किया है।
  15. भले ही कोई माने या न माने, किन्तु यह सभी शक्तियों को जगत से कोई नष्ट नहीं कर सकता। क्या कोई अग्निदेवता, पृथ्वीदेवता, सूर्यदेवता को नष्ट कर सकता है? ये सभी देव-देवता प्रकृति में समाविष्ट है। वे प्रकृति का अभिन्न अंग है। धर्म कभी भी इन देवी-देवताओं को नष्ट करने का आदेश नहीं देता।
  16. देवता का अर्थ है महान शक्तिया जो मनुष्य से शक्तिशाली है।
  17. यह ३३ दृश्य, अदृश्य शक्तिया जगत में ईश्वर ने उत्पन्न की है और वे जगत का संचालन करती है।
  18. इन देवताओं की उपासना करने से मनुष्य को अपनी इच्छित फलों की प्राप्ति होती है। इन देवी-देवताओं की उपासना से मनुष्य को भौतिक सुखों की भी प्राप्ति होती है।
  19. ये सारी देव-देवता निराकार परमात्मा के अधीन है। इसलिए इन देवताओं को ॐ गणेशाय नमः, ॐ हनुमतये नमः इस तरह संबोधित किया जाता है।
  20. जहा ॐ का उच्चारण नहीं वह परमात्मा का स्मरण नहीं। इसलिए प्रत्येक प्रार्थना के पहले ॐ का उच्चारण करो।
  21. परमात्मा के नाम का उच्चारण करने से सभी दोषों का निवारण होता है।
  22. जो ॐ का उच्चारण नहीं करते उनको दोष लगता है, उनके लिए अध्यात्मिक अधोगति है।
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