धर्म मार्गदर्शन

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1. ईश्वर

  1. ॐ श्रीपरमात्मने नमः
  2. ईश्वर निराकार है।
  3. इस निराकार ब्रह्म का नाम ॐ है। वह एक और केवल एक है। वह एक परमात्मा है।
  4. उसी से दुनिया उत्पन्न हुई है। वही इस जगत को संचालित करते है।
  5. पृथ्वी, सूर्य, चन्द्र तथा समस्त ब्रह्माण्ड उनके ही आदेशानुसार कार्य कर रहे है। वही एकमात्र चैतन्य है, जो इस सुष्टि को धारण किये हुए है।
  6. वह सच्चिदानन्द चैतन्य है। वही सर्वशक्तिमान, सामर्थ्यवान, सर्वव्यापी, समस्त ब्रह्माण्ड की महाशक्ति है।
  7. ईश्वर एक सनातन शक्ति है, वह एक ही है, वह ॐ है।
  8. ईश्वर निराकार, निर्विकार, नित्य, सर्वव्यापक, सनातन, सर्वज्ञ, सर्वेश्वर, सर्वाधार, न्यायकारी, दयालु, सबसे महान, अनादि, अनंत, अजन्मा, अंतर्यामी, सच्चिदानंद, सर्वशक्तिमान, सदापवित्र, अजर, अमर, सर्वद्रष्टा, नियन्ता, एकमात्र पूजनीय व् उपासनीय है।
  9. वह दीनबंधु, मुक्तिदाता है। वह अभय है, अनुपम है। वह सुष्टिकर्ता है। वही एकेश्वर है। यह सब ऐश्वर्य जो आप देख रहे है, वह उसी का है।
  10. जहा ॐ नहीं वहा धर्मं नहीं, जहा ॐ नहीं वहा श्रध्हा नहीं, जहा ॐ नहीं वहा भक्ति नहीं, जहा ॐ नहीं वहा मुक्ति नही, जहा ॐ नहीं वहा उद्धार नहीं, जहा ॐ नहीं वहा मोक्ष नहीं।
  11. इसलिए, हे मानवो, तुम इस एक एकमात्र ईश्वर के नाम का सतत उच्चारण करते रहो।
  12. इस निराकार ईश्वर की अनुभूति केवल ध्यान द्वारा ही आत्मा में होती है।
  13. इसलिए हे मानवो तुम ध्यानोपासना करो। ध्यान-उपासना ही एकमात्र निराकार उपासना है।
  14. ध्यान-उपासना के लिए नित्य एक विशिष्ट समय पर एकत्रित आकर ध्यान-उपासना को कायम करो।
  15. ईश्वर निराकार और सर्वव्यापक है। इस निराकार ईश्वर का साक्षात्कार इन्द्रियों द्वारा संभव नहीं है। निराकार ईश्वर का साक्षात्कार शुद्ध, शांत मन से ध्यान द्वारा ही आत्मा में होता है।
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